नारी ने नर को जनम दीया क्या खेल रचाया नारी ने

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन विविध भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

नारी ने नर को जनम दीया क्या खेल रचाया नारी ने

नारी ने नर को जनम दीया क्या खेल रचाया नारी ने।

एक नारी थी अनुसुइया जो स्वर्गलोक में रहती थीं।एक नारी थी अनुसुइया जो स्वर्गलोक में रहती थीं।

ब्रह्मा विष्णु और संकर को पलने में झुलाया नारी ने।

नारी ने नर को जनम दीया क्या खेल रचाया नारी ने

एक नारी थी सावित्री जो मृत्युलोक में रहती थी।

एक नारी थी सावित्री जो मृत्युलोक में रहती थी।

जब पति को यम लेने आया तो प्राण बचाए नारी ने।

नारी ने नर को जनम दीया क्या खेल रचाया नारी ने।

एक नारी थी कैकई मां दशरथ संग रण में रहती थी।

एक नारी थी कैकई मां दशरथ संग रण में रहती थी।

जब रथ का पहिया निकल गया बस उंगली फंसाई नारी ने।

नारी ने नर को जनम दीया क्या खेल रचाया नारी ने।

एक नारी थी शुलोचना जो लंकापुरी में रहती थीं।

एक नारी थी शुलोचना जो लंकापुरी में रहती थीं।

जब मेघनाथ का शीश कटा तो शीश हंसाया नारी ने।

नारी ने नर को जनम दीया क्या खेल रचाया नारी ने।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।