गुरु शरण जो मिल गई होती

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॥ पावन पाठ ॥

मुझे गुरुदेव के चरणों की, सेवा मिल गई होती।

भटकता यूं नहीं दर-दर, शरण जो मिल गई होती।।

मुझे गुरुदेव के चरणों की सेवा मिल गई होती,,,

1) फंसा हूं मोह माया में, तुम्ही आकर निकालो अब

ज्ञान की जोत से गुरुवर, तुम्ही मुझको निखारो अब

मुझे भी आपकी थोड़ी, दया जो मिल गई होती।

भटकता यूं नहीं दर-दर, शरण जो मिल गई होती।।

मुझे गुरुदेव के चरणों की, सेवा मिल गई होती,,,

2) जगत रिश्तो का बंधन है, बड़ा गहरा समंदर है।

मुझे विश्वास है इतना, गुरु करुणा के सागर है।

बिखरता यूं नहीं जीवन, प्रभु माला जपी होती।

भटकता यूं नहीं दर-दर, शरण जो मिल गई होती।।

मुझे गुरुदेव के चरणों की, सेवा मिल गई होती,,,

लेखक,गायक- पंडित मनोज नागर

9893377018,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।