मारे कोलू मंड रा पाबूजी दरबार थारे आया

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॥ पावन पाठ ॥

मारा कोलूमंड का पाबूजी दरबार थारे आया

मारा कोलुमण्ड रा पाबुजी,

दरबार थारे आया,

थारी केसर की आसवारी,

प्यारी लागे मारा पाबुजी,

दरस दिखाओ जी||

लक्ष्मण का अवतार पाबुजी,

धांधल रे घर आया,

थारी मधुधोखा तो मांवडली,

कहलावे मारा पाबुजी,

दरस दिखा वो सा||

अरे अमरकोटा सोडा रे माही,

पाबुजी परणाया,

अरे गांया री रक्षा रे खातिर,

फेरां सु थे जावोजी,

दरस दिखा वो सा||

धरती ओ राजस्थान री जी,

थे मोटरास पूजवाया,

थाने श्यामा सुन्दर,

जय सिंह रघुवंशी,

गावे

मार पाबूजी,

दरस दीखावो सा||

मारा कोलुमंड रा पाबुजी,

दरबार थारे आया,

थारी केसर री असवारी,

प्यारी लागे मारा पाबुजी,

दरस दिखाओ जी||

गायका/ एवं प्रेषक जयसिंह रघुवंशी गोयल अजमेर राजस्थान

9664103051

9983515290

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।