होली खेल रहे नंदलाल-राम अवतार

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

होली खेल रहे नंदलाल

होली, खेल रहे, नंदलाल,

वृंदा,वन की कुञ्ज गलिन में ll

वृंदा,वन की कुञ्ज गलिन में,

वृंदा,वन की कुञ्ज गलिन में ll

अरे होली, खेल रहे...

संग, सखा, श्याम के आए,

रंग, भर, पिचकारी लाए ll

हो, कर रहे,बुरो, हाल बेहाल,

वृंदा,वन की, कुञ्ज गलिन में,

अरे होली, खेल रहे...

चल, गली, रंगीली आए,

ढप, ढाल, मृदंग बजाए ll

अरे, गावें, नाचें, तोरे ताल,

वृंदा,वन की, कुञ्ज गलिन में,

अरे होली, खेल रहे...

रंग, भर, पिचकारी मारें,

चुनर की, आब, बिगाड़ें ll

हो मेरे, मुख पे, मलो गुलाल,

वृंदा,वन की, कुञ्ज गलिन में,,,

अरे होली, खेल रहे...

कभी, बंसी, मधुर बजावे,

कभी, भारी, रंग बरसावे l

हो कभी, रंग, उड़ाए गुलाल,

वृंदा,वन की, कुञ्ज गलिन में,

अरे होली, खेल रहे...

नंद, गांव के, छैल बिहारी,

बर,साने की, राधा प्यारी ll

हो हिल मिल, खेलें, गोपी ग्वाल,

वृंदा,वन की, कुञ्ज गलिन में,

अरे होली, खेल रहे...

ये छवि, निरखें, बनवारी,

सब, भक्त, बजावे ताड़ी ll

अरे रे रंग, डाल रहे, सब ग्वाल,

वृंदा,वन की, कुञ्ज गलिन में,

अरे होली, खेल रहे...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।