सुन लाख टका की बात रे

सुश्री अखिलेश्वरी देवी
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सुन लाख टका की बात रे।

जो तोहिँ मानत रहत आपुनो, सुत दारा पितु भ्रात रे।

सो सब धोखा जान मूढ़ मन, है सब स्वारथ नात रे।

जब ये जानत नहिं आपन हित, भटकट जग दिन रात रे।

तब ये कहा करैं हित तेरो, तू इन कत पतियात रे।

अब ‘कृपालु’ तू तोरि नात सब, जोर नात बलभ्रात रे॥

भावार्थ :- अरे मन ! लाख टका की बात सुन । जो पुत्र, पिता, भाई आदि तुझे अपना मानते रहते हैं, यह सब धोखा है । क्योंकि वे लोग अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए ही ऐसा करते हैं । अरे मन ! जब ये लोग अपना ही वास्तविक हित नहीं समझते और सांसरिक विषयों में भटकते रहते हैं तब भला ये तेरा क्या हित करेंगे । तू इन पर क्या विश्वास करता है । ‘श्री कृपालु जी’ कहते हैं कि अरे मन ! अब तू सबसे नाता तोड़कर एकमात्र श्यामसुन्दर से नाता जोड़ ले।

पुस्तक : प्रेम रस मदिरा, सिद्धांत माधुरी

पद संख्या : 114

पृष्ठ संख्या : 56

सर्वाधिकार सुरक्षित © जगद्गुरु कृपालु परिषत्

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।