आरती असुर निकंदन की

पारंपरिक
हनुमान जी आरती हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

धुन- आरती कुंज बिहारी की

आरती असुर निकंदन की।

पवनसुत केशरी नंदन की ।।

1.ज्ञान के सागर हैं हनुमंत।

पड़े पद युगल उपासक संत।

कमल हिय राजै सिय-भगवंत ।।

परमप्रिय-2

परमप्रिय भक्त शिरोमणि की ।।

पवन सुत केशरी नंदन की ।।

आरती असुर निकंदन की।

पवनसुत केशरी नंदन की ।।

2.सीय-रघुवर के तुम प्यारे।

साधु-संतन के रखवारे।

असुर कुल के तुम संहारे।

परमबल-2

परम बलवान शिरोमणि की ,

पवन सुत केशरी नंदन की ।।

आरती असुर निकंदन की।

पवनसुत केशरी नंदन की ।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।