कुटिया में आ गई बाहर जय श्री राधे राधे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

होली का आया है त्यौहार श्री राधे राधे

कुटिया में आई है बहार श्री राधे राधे

कान्हा की आंखें काली मैं तो हो गई मतवाली

मेरा तो बदल गया व्यवहार श्री राधे राधे

कुटिया में आई है बहार श्री राधे राधे

होली का आया है त्यौहार श्री राधे राधे

संतों की महिमा निराली मुखड़े पर रहती लाली

उनका तो कान्हा से है प्यार श्री राधे राधे

कुटिया में आई है बहार श्री राधे राधे

होली का आया है त्यौहार श्री राधे राधे

होली के रंग निराले नीले पीले और काले

इनकी मस्ती है अपार श्री राधे राधे

होली का आया है त्यौहार श्री राधे राधे

कुटिया में आई है बहार श्री राधे राधे

मेरा तो चोला रंग दे संतों का मुझको रंग दे

संतों की महिमा अपरंपार श्री राधे राधे

होली का आया है त्यौहार श्री राधे राधे

कुटिया में आ गई बहार श्री राधे राधे

दुनिया की चाल अनूठी यह तो बस रहती रूठी

कर लो तुम कान्हा से ही प्यार श्री राधे राधे

कुटिया में आई है बहार श्री राधे राधे

होली का आया है त्यौहार श्री राधे राधे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।