कान्हा रोज रोज तुमको सजाता रहूँ

सियाराम जी
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कान्हा रोज रोज तुमको सजाता रहूँ और मनाता रहूँ,

पर भजन में कभी कुछ कमी हो नहीं ।

दुग्ध-दधि-जल-शहद से नहलाया करूँ,

रेशमी वस्त्र सुन्दर पहनाया करूँ ।

तेरे नयनों में कजरा लगाता रहूँ, गीत गाता रहूँ,

पर भजन में कभी कुछ कमी हो नहीं ॥ कान्हा....

कुंकुम-केसर के चन्दन लगाऊँ तुझे,

पुष्पमाला मैं सुन्दर पहनाऊँ तुझे ।

पग में पैजनियाँ सुन्दर पहनाता रहूँ और नचाता रहूँ,

पर भजन में कभी कुछ कमी हो नहीं ॥ कान्हा....

प्यार से सुन्दर व्यंजन खिलाऊँ तुझे,

दुग्ध में मिश्री-केसर पिलाऊँ तुझे ।

तेरे सेवा में तन-मन लगाता रहूँ, मुस्कुराता रहूँ,

पर भजन में कभी कुछ कमी हो नहीं || कान्हा....

साथ में गाके लोरी सुलाऊँ तुझे,

प्यारा-सा गीत गा के जगाऊँ तुझे ।

कान्त सपनों में भी मैं सजाता रहूँ और मनाता रहूँ,

पर भजन में कभी कुछ कमी हो नहीं ॥ कान्हा.....

भजन रचना : प• पू• श्री श्रीकान्त दास जी महाराज

स्वर : सियाराम जी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।