होली खेल रहे भोलेनाथ देखो गौरा के पीहर मे

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

होली खेल रहे भोलेनाथ देखो गौरा के पीहर मे

गौरा की बहन नीराली वो वैष्णो जम्मू वाली

करती रंगो की बरसात देखो गौरा के पीहर मे

होली खेले भोलेनाथ...

गौरा की बहन नीराली वो काली कलकत्ते वाली

वो भींग रही खूद साथ देखो गौरा के पीहर मे

होली खेले भोलेनाथ...

गौरा की बहन नीराली वो ज्वाला हिमाचल वाली

भोले हंस के करते बात देखो गौरा के पीहर मे

होली खेले भोलेनाथ...

गौरा की बहन नीराली वो सीता जनकपुर वाली

होली खेले सारी रात देखो गौरा के पीहर मे

होली खेले भोलेनाथ...

गौरा की बहन नीराली हाजी हरिद्वार वाली

खेले पकड़ पकड़ के हाथ देखो गौरा के पीहर मे

होली खेले भोलेनाथ...

गौरा की बहन नीराली वो नैनिताल वाली

भर रही रंगो की परात देखो गौरा के पीहर मे

होली खेले भोलेनाथ...

गौरा की बहन नीराली वो विंध्याचल वाली

बोली तू डाल मै पात देखो गौरा के पीहर मे

होली खेले भोलेनाथ...

गौरा की बहन नीराली वो तूलसी जी मतवाली

जैसे लहरे हवा के साथ देखो गौरा के पीहर मे

होली खेले भोलेनाथ...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।