जय जय पिय प्यारी, सुकुमारी, भोरी भारी नथवारी

सुश्री अखिलेश्वरी देवी
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जय जय पिय प्यारी, सुकुमारी, भोरी भारी नथवारी।

बलिहारी, छवि प्यारी, ऊँचे महल अटा वारी ॥

पुस्तक : ब्रज रस माधुरी

पद संख्या : 47

पृष्ठ संख्या : 109

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।