॥ पावन पाठ ॥
दोहा :-
होरी के दिनां मोसे दून दून अटकै
सिंगटा दिखाया गोरी नाचै कूदै मटकै |
कावरिया पकर मोरी पीताम्बरी झटकै
नंद कौन अनारी मेरे नैनन में खटकै ||
कन्हैया होरी खेलन कौन बरसाने गांव में आयौ
मिली वहां राधा प्यारी दोऊ मिलकै फाग मचायौ
कन्हैया होरी खेलन कौं..