मेरे गुरुवर भक्ति रस अवतार

सुश्री अखिलेश्वरी देवी
श्री कृष्ण भजन गुरुदेव भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरे गुरुवर भक्ति रस अवतार।

गुरु कह गुरु हरि दोउ इक सार।

गुरु कह गुरु का अधिक आभार।

गुरु कह तन करे जग व्यवहार।

गुरु कह मन करे हरि सों ही प्यार।

गुरु कह माँगो रो के निष्काम प्यार।

गुरु कह हरि गुरु को ही उर धार।

गुरु कह गुरु करुणा भंडार।

गुरु कह गुरु दीनन रखवार।

गुरु कह गुरु निराधार आधार।

गुरु कह हरि गुरु सेवा सार।

गुरु कह गुरु ही 'कृपालु' कर्णधार॥

पुस्तक : ब्रज रस माधुरी ,भाग -2

कीर्तन संख्या : 2

पृष्ठ संख्या : 2

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।