ऐसी समाधि लगाई रे भोला अखियां ना खोले

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

ऐसी समाधि लगाई रे भोला अखियां ना खोले,

अखियां ना खोले अखियां ना खोले.....

रिद्धि भी जगाए सिद्धि भी जगाए,

गणपत ने शंख बजाई रे भोला अखियां ना खोले,

ऐसी समाधि लगाई रे भोला अखियां ना खोले.....

ब्रम्हा भी जगाए विष्णु भी जगाए,

नारद ने वीणा बजाई रे भोला अखियां ना खोले,

ऐसी समाधि लगाई रे भोला अखियां ना खोले.....

राम भी जगाए उन्हें लक्ष्मण भी जगाए,

हनुमत ने चुटकी बजाई भोला अखियां ना खोले,

ऐसी समाधि लगाई रे भोला अखियां ना खोले.....

सीता जी जगाए उन्हें राधा जी जगाए,

गौरा ने पायल छनकाई रे भोला अखियां ना खोले,

ऐसी समाधि लगाई रे भोला अखियां ना खोले.....

संत भी जगाए महंत भी जगाए,

भक्तों ने विनती सुनाई रे भोला अखियां ना खोले,

ऐसी समाधि लगाई रे भोला अखियां ना खोले......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।