उलझ मत दिल बहारों में

दासानुदास श्रीकान्त दास जी महाराज ।
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

उलझ मत दिल बहारों में,

बहारों का भरोसा क्या ।

सहारे टूट जाते हैं,

सहारों का भरोसा क्या ।।

तमन्नायें जो तेरी हैं,

फुहारे हैं ये सावन की ।

फुहारे सूख जाती हैं,

फुहारों का भरोसा क्या ।।

दिलासे जो जहाँ के हैं,

सभी रंगीं बहारें हैं।

बहारे रूठ जाती हैं,

बहारों का भरोसा क्या ।।

तू इन फूले गुब्बारों पर,

अरे दिल क्यों फिदा होता ।

गुब्बारे फूट जाते हैं,

गुब्बारों का भरोसा क्या ।।

तू सम्बल नाम का लेकर,

किनारों से किनारा कर ।

किनारे टूट जाते हैं,

किनारों का भरोसा क्या ।।

तू अपनी अक्लमंदी पर,

बिचारों पर न इतराना ।

जो लहरों की तरह चंचल,

विचारों का भरोसा क्या ।।

परम प्रभु की शरण लेकर,

विकारों से सजग रहना ।

कहाँ कब मन बिगड़ जाये,

विकारों का भरोसा क्या ।।

भजन रचना : पथिक जी महाराज ।

स्वर : दासानुदास श्रीकान्त दास जी महाराज ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।