किन्नी सोहणी लाल लाल पालकी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

किन्नी सोहणी लाल लाल पालकी

धुन- गड्डी जांदी इ छलांगें मार्डी

किन्नी, सोहणी, लाल लाल पालकी,

जंज,आई मेरे, भोलेनाथ दी ll

ब्रह्मा, विष्णु, बाराती, देवी देवता हैं साथी ll

बने, राम ते, कृष्ण सार्थी,

जंज,आई मेरे, भोलेनाथ दी l

किन्नी, सोहणी, लाल लाल पालकी,

बैल, पे चढ़‌के, आए शिव शंकर,

जटा, में गंगा की धारा l

हाथ, में डमरू, डम-डम बाजे,

गले में, नाग की माला ll

ओ किन्नी, सोहनी है बारात,

मेरे, भोले जी है साथ l

सारे, खुशियाँ, मनाएं साथ जी,

जंज,आई मेरे, भोलेनाथ दी l

किन्नी, सोहणी, लाल लाल पालकी,

तारे, टिम टिम, चमक रहे हैं,

बोले, मधुर सी बोली l

भोले, बाबा, लेने चले हैं,

इक, दुल्हन, की डोली ll

सारे, टुक-टुक देखें, चंदा, छुप छुप देखें l

आई, गौरां भी, उनके साथ जी,

जंज,आई मेरे, भोलेनाथ दी l

किन्नी, सोहणी, लाल लाल पालकी,

पंडित, जी ने, जदों लांवां विच,

अगला, हुकम सुनाया l

की गल्ल, नारद जी,

अज्ज लाड़े दा, पियो क्यों नी आया ll

बोले, शिव भगवान, सारा, मेरा है जहान l

मैं, सरियाँ दा, माई बाप जी,

जंज,आई मेरे, भोलेनाथ दी l

किन्नी, सोहणी, लाल लाल पालकी,

हर हर महाँदेव

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।