मंदिरा दे बूहे अज्ज खोलो

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मंदिरा दे बूहे अज्ज खोलो

मंदिरा दे, बूहे अज्ज खोलो,

मेरे, भोले जी ने आना ए ll

भोले जी ने, आना शिव,

शंकर, जी ने आना ए ll

मंदिरा दे, बूहे अज्ज ,

भोले जी की, जटा में, गंगा बिराजे ll

गंगा, बिराजे भोले, गंगा बिराजे l

ओ डूबकियां, ला लो, अज्ज सारे,

मेरे, भोले जी ने आना ए l

मंदिरा दे, बूहे अज्ज ,

भोले जी के, माथे पे, चंदा बिराजे ll

चंदा, बिराजे भोले, चंदा बिराजे l

ओ चानण, होेएया, चार चुफेरे,

मेरे, भोले जी ने आना ए l

मंदिरा दे, बूहे अज्ज ,

भोले जी के, गले में, नाग़ बिराजे ll

नाग़, बिराजे भोले, नाग़ बिराजे l

ओ दूध, पिला लो, अज्ज सारे,

मेरे, भोले जी ने आना ए l

मंदिरा दे, बूहे अज्ज ,

भोले जी के, हाथ में, डमरू बिराजे ll

डमरू, बिराजे भोले, डमरू बिराजे l

ओ भंगड़े, पा लो, अज्ज सारे,

मेरे, भोले जी ने आना ए l

मंदिरा दे, बूहे अज्ज ,

भोले जी के, पैरों में, नंदी बिराजे ll

नंदी, बिराजे भोले, नंदी बिराजे

ओ अरज़, लगा लो, अज्ज सारे,

मेरे, भोले जी ने आना ए l

मंदिरा दे, बूहे अज्ज ,

हर हर महांदेव

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।