भोले की आई है बारात

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले की आई है बारात

धुन- मत्थे ते चमकन वाल

भोले की, आई है बारात, सब को बधाई हो ll

आई है, गौरां जी के द्वार, सब को बधाई हो l

भोले की, आई है बारात,

क्या कुछ, पहना, दूल्हे ने सखियों ll

गौरा ये, पूछ रही आज, सब को बधाई हो l

भोले की, आई है बारात,

भस्म, रमाए गले, सर्पों की माला ll

जटा में है, गंगा साथ, सब को बधाई हो l

भोले की, आई है बारात,

कैसा, है मुखड़ा, दूल्हे का सखियों ll

दिल क्यों ये, धड़के बार बार, सब को बधाई हो l

भोले की, आई है बारात,

मुखड़ा, क्या पूछे गौरां, बुढ्ढा सो साल का ll

ना मुंह में, दांत ना ही आंत, सब को बधाई हो l

भोले की, आई है बारात,

कौन-कौन, बाराती, आए ससुराल से ll

शगुन में, लाए क्या साथ, सब को बधाई हो l

भोले की, आई है बारात,

भूत, प्रेत आए, सारे बराती ll

सर्पों की, गूंजे फुंकार, सब को बधाई हो l

भोले की, आई है बारात,

हाथ जोड़, कहे गौरां, सुनो भोले नाथ जी ll

शादी तो, दूर की है बात, होगी जग हंसाई हो l

भोले की, आई है बारात,

रूप, बनाया सुंदर, उम्र सौलह की ll

फूलों की, हुई बरसात, सबको बधाई हो l

भोले की, आई है बारात,

हर हर महांदेव

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।