ए भोला रउरी मड़ईया बड़ी भयावन लागे

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

ए भोला रऊरी मडईया बड़ी भयावन लागे

एक ओरी बघवा बैठे एक ओरी बैला बैठे

बीचवा मे नाचेले नगीनीया बड़ी भयावन लागे

ए भोला...

कार्तिक मोर बैठी घूमेले अंगनवा हो

मूषक चढी दऊरेले गणपती ललनवा हो

मारे कीलकारी भूतवा डईनीया भयावन लागे

ए भोला...

मांगे प ईचवा गईनी रउरे अंगनवा हो

धनवा मे धनवा देखनी सीलवट लोढ़वा हो

भर घरवा घूमेला गोजरवा भयावन लागे

ए भोला...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।