शिवरात्री दीयां वधाईयां

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिवरात्री दीयां वधाईयां

अज लख लख होन वधाईयां, शुभ शिवरात्री दीयां ।।

शिव चौदश नूँ तड़के तड़के ।

शिव शंकर दा डमरू खड़के ।।

वजे ढोल वजन शहनाईयां - शुभ शिवरात्री.

शिव बूटी दे ला ला रगड़े ।

शिव भगतां मिल पाए भंगड़े ।।

पी पी बाटे भंग शरदाईयां - शुभ शिवरात्री.

मन्दिर मन्दिर लगा मेला ।

हर कोई मस्त फिरे अलबेला ।।

अज रौनकां दून सवाईयां - शुभ शिवरात्री.

शिव चौदश दी रात अनोखी ।

शिव - गौरां दी बारात अनोखी ।।

सबै रज रज खान मठाईयां - शुभ शिवरात्री.

फगन दी रूत, रूत बसन्ती ।

देख 'मधुप' हर पासे मस्ती ।।

फुल कलियां खिल मुसकाईयां - शुभ शिवरात्री.

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।