राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे। प्रेम रूप रस राधे राधे राधे

सुश्री अखिलेश्वरी देवी
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे।

प्रेम रूप रस राधे राधे राधे।

राधे राधे प्रेम अगाधे राधे राधे।

भूलूँ न तोहिं पल आधे राधे राधे।

तुम भी न भूलो मोहिं राधे राधे राधे।

प्रेम सुधा दे राधे राधे राधे।

छोड़ें नहिं पाछा अब राधे राधे राधे।

तू ही रति गति मति राधे राधे राधे।

अगति की गति तू ही राधे राधे राधे।

पतितपावनी राधे राधे राधे।

छवि को भी छवि दे राधे राधे राधे।

कृपाकारिणी राधे राधे राधे।

अधम उधारिनि राधे राधे राधे।

पुस्तक : युगल माधुरी

कीर्तन संख्या : 32

पृष्ठ संख्या : 114

सर्वाधिकार सुरक्षित © जगद्गुरु कृपालु परिषत्

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।