लै जानी गौरां सप्पां वाले ने

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

लै जानी गौरां सप्पां वाले ने

लै जानी, लै जानी,

गौरां, सप्पां वाले ने, लै जानी ll

नहीं जाना, नहीं जाना,

असां, सप्पां वाले नाल, नहीं जाना ll

ब्रह्मा, भी नच्चेया ते, बिष्णु, भी नचेया ll

संग, बजदे नगाड़े और ढोल, गौरां लै जानी ll

लै जानी, लै जानी, गौरां, सप्पां,

भूत, भी नचदे ते, प्रेत, भी नचदे ll

संग, पीदें भंग अज घोट, गौरां लै जानी ll

लै जानी, लै जानी, गौरां, सप्पां,

नंदी, भी नचदा ते, भृंगी, भी नचदा ll

संग, नचदा है सारा कैलाश, गौरां लै जानी ll

लै जानी, लै जानी, गौरां, सप्पां,

शुक्र, भी नच्चेया ते, शनिचर, भी नच्चेया ll

पै गया, भंगड़ा भूतां दे नाल, गौरां लै जानी ll

लै जानी, लै जानी, गौरां, सप्पां,

संत, भी नचदे ते, महंत, भी नचदे ll

और, बजदे ने मीठे-मीठे ढोल, गौरां लै जानी ll

लै जानी, लै जानी, गौरां, सप्पां,

सतगुर, नच्दे ते, मंडली भी नचदी ll

पै गया, गिद्दा सखियाँ दे नाल, गौरां लै जानी ll

लै जानी, लै जानी, गौरां, सप्पां,

हर हर महांदेव

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।