ढोली ढोल वजाना

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

ढोली ढोल वजाना

ढोली, ढोल वजाना, ताल से, ताल मिलाना ll

भोले की, बारात आई रे, बोलो, बम भोले की ll

भोले की, बारात में, ब्रह्मा जी आए ll

ब्रह्मा जी, आए संग, ब्रह्माणी जी को लाए ll

वोह तो वेद, सुनाते, आए रे, बोलो, बम भोले की l

ढोली, ढोल वजाना, ताल से,

भोले की बारात में विष्णु जी आए ll

विष्णु जी आए संग लक्ष्मी जी को लाए ll

वोह तो चक्र, चलाते, आए रे, बोलो, बम भोले की l

ढोली, ढोल वजाना, ताल से,

भोले की, बारात में, राम जी आए ll

राम जी, आए संग, सीता जी को लाए ll

वोह तो धनुष, चलाते, आए रे, बोलो, बम भोले की l

ढोली, ढोल वजाना, ताल से,

भोले की, बारात में, कृष्ण जी आए ll

कृष्ण जी, आए संग, राधा जी को लाए ll

वोह तो बंसी, वजाते, आए रे, बोलो, बम भोले की l

ढोली, ढोल वजाना, ताल से,

भोले की, बारात में, भूत गण आए ll

भूत गण, आए संग, नंदी जी को लाए ll

वोह तो, नच्दे टप्पदे, आए रे, बोलो, बम भोले की l

ढोली, ढोल वजाना, ताल से,

भोले की, बारात में, संगत भी आई ll

संगत भी, आई संग, ढोलक चिमटा लाई ll

वोह तो भजन, गाते आए रे, बोलो, बम भोले की l

ढोली, ढोल वजाना, ताल से,

हर हर महांदेव

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।