फूलो और कलियां में बहार आ गई

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

फूलों और कलियों में बहार आ गई,देख

गौरा तेरी बारात आ गई,फूलों और कलियों

में बहार……

शीश पे उनके गंगा की मौरी,माथे पे उनके

चंदा की रोरी,नन्दी पे भोले की सवारी आ

गई,देख गौरा तेरी बारात आ गई…….

गले भोले के सरपों की माला,कानों में उनके

बिच्छू का बाला,भाग धतूरे की बौछार हो

गई,देख गौरा तेरी बारात आ गई…….

हाथों में भोले के डमरू का बाजा,तन पे है

उनके भस्मी का जामा,डोल नगाडों की

झंकार हो गई,देख गौरा तेरी……..

करके अगवानी नारद जी आये,देवों को लेके

ब्रम्हा भी आये,भूतों के संग बारात आ गई,

देख गौरा तेरी बारात आ गई……..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।