पर्वत पे डमरू बजावे भोले बाबा- नया संस्करण

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

पर्वत पे डमरू बजावे भोले बाबा

पर्वत, पे डमरू, बजावे भोले बाबा ll

बजावे, भोले बाबा, बजावे भोले बाबा ll

पर्वत, पे डमरू, बजावे भोले..

डमरू, की धुन सुन, ब्रह्मा जी आए l

ब्रह्मा, जी आए संग, ब्रह्माणी को लाए l

नारद, मुनि को, नचावे भोले बाबा l

पर्वत, पे डमरू, बजावे भोले..

डमरू, की धुन सुन, विष्णु जी आए l

विष्णु, जी आए संग, लक्ष्मी जी को लाए l

सारे, देवों को, नचावे भोले बाबा l

पर्वत, पे डमरू, बजावे भोले..

डमरू, की धुन सुन, दाऊ जी आए l

दाऊ, जी आए संग, कान्हा जी को लाए l

राधा, को संग में, नचावे भोले बाबा l

पर्वत, पे डमरू, बजावे भोले..

डमरू, की धुन सुन, रामा जी आए l

रामा, जी आए संग, सीता जी को लाए l

हनुमत को, संग में, नचावे भोले बाबा l

पर्वत, पे डमरू, बजावे भोले..

डमरू, की धुन सुन, गणपति जी आए l

गणपति, जी आए संग, रिद्धि सिद्धि लाए l

शुभ, लाभ को, संग में, नचावे भोले बाबा l

पर्वत, पे डमरू, बजावे भोले...

डमरू, की धुन सुन, मईया जी आई l

मईया, जी आई संग, लांगुर को लाई l

भक्तों को, संग में, नचावे भोले बाबा l

पर्वत, पे डमरू, बजावे भोले..

हर हर महांदेव

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।