ढोल बाबे दे विआह विच(पंजाबी)

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

ढोल बाबे दे विआह विच(पंजाबी)

धुनः मुंडा अपने विआह विच नचदा फिरे मुंडा अपने

लै लै हुलारे कोई नचदा फिरे, नचदा फिरे ते कोई टपदा फिरे,

गज्जदा फिरे ते कोई वसदा फिरे,

ढोल बाबे दे, ढोल बाबे दे विआह विच वजदा फिरे-ढोल,

शिव भोले दे विआह दा बड़ा चा ए,

दिन चौदश दा गया अज आए।।

झूम झूम सिर पैर पए उठदे, मौज़ मस्ती बाराती पए लुटवे,

बैठा बैल उत्ते लाड़ा, सेहरा चकदा फिरे नी-ढोल बाबे दे

हर पासे अज रौनकां सवाईयां ने, शिव भगतां नूं मिलीयां वधाईयां ने।।

शिवगण देखो किड्रे सोहने लगदे, देख देख शिव भोले वल नचदे

नच नच, इक दूजे विच वजदा फिरे नी ढोल बाबे दे

बड़े खुश राजा रानी, खुश लोक ने, शिव दरस पा मिट गए शोक ने।।

भाग गौरां दे'मधुप 'अज जागे ने। आए वरन कैलाशपति राजे ने,

मींह खुशीयां दा हर पासे वसदा फिरे नी-ढोल बाबे दे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।