भोले दी हो गई सगाई

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले दी हो गई सगाई

धुनः मथे ते चमकन वाल अज मेरे बनड़े दे (पंजाबी)

भोले दी हो गई सगाई, जी वधाई होवे ।।

शिव शंकर कैलाश दा राजा,

बन गया शैल दा जवाई-जी वधाई होवे.

वज्जे ढोल मरदंग मजीरे,

वज्ज रही है शहिनाई जी वधाई होवे.

नच्च रहे गण, संत भगत जन,

नच्च रही सकल खुदाई जी वधाई होवे.

गरी शवारे, मिशरी मेवे,

बट रहे फल ते मिठाई जी वधाई होवे.

देवी देव 'मधुप' खुश होए,

खुश ने सब भैंण भाई जी वधाई होवे.

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।