जोगी जो तेरे बिना दिल ना लगे

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॥ पावन पाठ ॥

तेरा दर छड़ किदर नू जामा

तेरे बिना दिल ना लगे

जोगी जो तेरे बिना दिल ना लगे

दर तेरे आके दाता शिश नू चकोंदे ने

तेरे नाल गुड़ियाँ प्रीता असि लादे ने जोगी

मन म्हो लेन तेरियाँ आदमा

तेरे बीना दिल ना लगे

तेरा दर छड़ किदर नू जामा

तेरे बिना दिल ना लगे

तेरे हाथ जिंदगी दी डोर हुन्न जोगिया

तेरे बिना साड्डा कोई होर नियो जोगिया

तेरे चाले उथे हर साल आमा

तेरे बिना दिल ना लगे

तेरा दर छड़ कीदर नू जामा

तेरे बिना दिल ना लगे

दर तेरे आमा ए नवीन रेह दा सोचदा

दर्श तेरे नू जस्सी रामशहरी लोचदा

झंडा रॉट तेरे दर ते चडामाँ

तेरे बिना दिल ना लगे

तेरा दर छड़ किदर नू जामा

तेरे बिना दिल ना लगे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।