मेरे पैरां बिच घुंघरू पादे,मैं वृंदावन आवां नचदी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

दिल विच्च तार इश्क़ दी वज्दी ए, ते नाले वज्दी खंजरी ए,

मैं ते नच्च के श्याम मना लैना, भेड़े लोक केहन भावे कंजरी ए ।

नचना वी इबादत बन जांदा, नचने दा जे कोई चज होवे,

ओ वाट मक्के दी क्यों पावे, जिदा श्याम नू वेखेया हज होव ॥

मेरे पैरां बिच घुंघरू पादे,मैं वृंदावन आवां नचदी,

मैं वृंदावन आवां नचदी, मैं वृंदावन आवां नचदी,

फड़ उंगली ते नचना सिखा दे, मैं वृंदावन आवां नचदी..

1: रोम रोम मेरा रंग बिच रंगया,

तेरे दीदार बाजों कुछ भी ना मंगया,

ओ मेनू मस्ती दा जाम पीला दे,

मैं वृंदावन आवां नचदी..

2: आवां छाल मार ऐथे भगतां दे नाल जी,

नच नच कर देवां दर ते कमाल जी,

दिलों दूरी वाला पर्दा हटा दे,

मैं वृंदावन आवां नचदी..

3:दर तेरे आके सारे पांदे ने बोलियां,

हर शहरों आंदियां ने वृंदावन टोलियां,

ओ भाग साढे भी आज्ज तू जगा दे,

मैं वृंदावन आवां नचदी..

4: ओ रूप तेरे दी मैं होई दीवानी,

नच नच के मैं होई मस्तानी,

ओ मेनू चरणा च अपने लगा ले,

मैं वृंदावन आवां नचदी...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।