मेरे भोले की बारात में ढोल नगाड़े बाजे

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मेरे भोले की बारात में

ढोल नगाड़े बाजे

भांग धतूरा पीकर भोले

चले हैं ब्याह रचाने

मेरे भोले की बारात में

सर्पो की है माला गले में

अंग भभूत लगी है

भाल चन्द्रमा हाथ में डमरू

अजब सी इनकी छवि है

शिव भोले के आगे आगे

भुत प्रेत भी नाचे

मेरे भोले की बारात में

पार्वती की जिद से देखो

कैसा शुभ दिन आया

भूत नाथ भगवान ने गौरां

जी से ब्याह रचाया

धुनि खूब रमाने वाले

चले हैं गौरां लाने

मेरे भोले की बारात में

कोई ढोल बजाता जाए

कोई नाच नचावे

शिव पर फूल चढ़ावे कोई

रंग गुलाल उड़ावे

हाहा कार मचाते जाए

कोई एक ना माने

मेरे भोले की बारात मे

धूमधाम से शिव बारात जब

पार्वती घर आई

देव गणो और भक्तजनो में

कैसी खुशियां छाई

वरमाला ले आई गौरा

शिव जी को पहनाने

मेरे भोले की बारात मे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।