घर में पधारो मेरी अम्बे माँ

सुधीर राजपूत
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

घर में पधारो मेरी अम्बे माँ

कष्ट निवारो मेरी अम्बे माँ

आओ मेरी माँ. आओ मेरी माँ

आओ मेरी माँ आ भी जाओ मेरी माँ

कब से तेरी राह तकूं आओ मेरी माँ

नैनो कि ये प्यास अब बुझाओ मेरी माँ

बिन तेरे ये घर लागे वीराना

अब तो दुनिया वाले भी मारते ताना

घर में पधारो...

ज़िंदग़ी की डोर मेरी तेरे हवाले

डूब रहा बीच भंवर अब तो बचा ले

तेरे शिवा माँ कोई ना मेरा

चारों तरफ़ा दिखें अब तो अंधेरा

घर में पधारो...

जब भी तेरा नाम लिया काम हुआ माँ

गिरते हुए बालक को थाम लिया मां

तु ममता की दुलार दे दे अपना प्यार।

होगा ना खाली माँ तेरा भंडार

घर में पधारो...

कृपा करो खुशियां भरो दामन में माँ

अपने पावन चरण रखो आँगन में माँ

अमन भक्त ये तेरा पुजारी

निश दिन करे माँ सेवादारी

घर में पधारो मेरी अम्बे माँ

कष्ट निवारों मेरी अम्बे माँ

सिंगर: सुधीर राजपूत

लेखक: सुधीर राजपूत

म्यूज़िक:DN मिश्रा जी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।