मैं ना खेलू होली ओ कान्हा तेरे संग

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जाने दे रे कान्हा ना कर मोहे तंग,

मैं ना खेलू होली ओ कान्हा तेरे संग,

अरे मैं ना खेलू होली ओ कान्हा तेरे संग,

पिछले बरस की होली याद है सबको ,

कितना सताया कान्हा तूने मुझको,

फिर से ले आया तू होली के वोही रंग ,

मैं ना खेलू होली ओ कान्हा तेरे संग,

अरे मैं ना खेलू होली ओ कान्हा तेरे संग,

अब ना चलेगा तेरा कोई बहाना,

दूर ही रहना मेरे पास ना आना,

पास आके कान्हा ना छूना मेरा अंग ,

मैं ना खेलू होली ओ कान्हा तेरे संग,

अरे मैं ना खेलू होली ओ कान्हा तेरे संग,

कैसे मैं जाने दूं तुझको गोरी,

कैसे मैं छोड़ू तेरी चुनर कोरी,

कोरी तेरी चुनर पे लगाऊं आज रंग,

मैं तो खेलू होली ओ राधा तेरे संग,

अरे मैं तो खेलू होली ओ राधा तेरे संग,

Bhajan Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।