रोम रोम में रमा हुआ है

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

रोम रोम में रमा हुआ है, मेरा राम रमैया तू,

सकल सृष्टि का सिरजनहारा,

राम मेरा रखवैया तू,

तू ही तू, तू ही तू, ...

डाल डाल में, पात पात में,

मानवता के हर जमात में,

हर मज़हब, हर जात पात में

एक तू ही है, तू ही तू,

तू ही तू, तू ही तू, ...

सागर का ख़ारा जल तू है,

बादल में, हिम कण में तू है,

गंगा का पावन जल तू है,

रूप अनेक, एक है तू,

तू ही तू, तू ही तू, ...

चपल पवन के स्वर में तू है,

पंछी के कलरव में तू है,

भौरों के गुंजन में तू है ,

हर स्वर में ईश्वर है तू,

तू ही तू, तू ही तू, ...

"तन है तेरा, मन है तेरा,

प्राण हैं तेरे, जीवन तेरा,

सब हैं तेरे, सब है तेरा,"

पर मेरा इक तू ही तू,

तू ही तू, तू ही तू, ...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।