जब होवे, सच्चा प्यार, क्यों ना मिले कन्हैया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जब होवे सच्चा प्यार

कौन कहता है, दीदार नहीं होता l

आदमी खुद ही, तलबग़ार नहीं होता l

उनसे मिलना है तो, पहले प्रह्लाद बनो l

वर्ना यूँ ही, नर सिंह का, अवतार नहीं होता ll )

जब होवे, सच्चा प्यार, क्यों ना मिले कन्हैया ।

क्यों ना, मिले कन्हैया, क्यों ना मिले कन्हैया ll

जब मिले..जय हो lll, तार से तार,

क्यों ना मिले कन्हैया l

जब होवे, सच्चा प्यार, क्यों ना...

चंचल मन को, तूँ समझा ले l

हरि चरणों में, प्रीत लगा ले ll

और मन से...जय हो lll, तज अहंकार,

क्यों ना मिले कन्हैया,,,

जब होवे, सच्चा प्यार, क्यों ना...

वन में बैठी, शबरी माई l

राम नाम की, लगन लगाई ll

किए दरसन...जय हो lll, अवध कुमार,

क्यों ना मिले कन्हैया..

जब होवे, सच्चा प्यार, क्यों ना...

पिता ने जब, प्रल्हाद सताया l

अपने प्रभु का, ध्यान लगाया ll

तब नर सिंह,,,जय हो lll, लिया अवतार,

क्यों ना मिले कन्हैया..

जब होवे, सच्चा प्यार, क्यों ना...

दुर्योधन ने, जाल बिछाया l

अर्जुन शरण, कृष्ण की आया ll

बने सारथी..जय हो lll कृष्ण मुरार,

क्यों ना मिले कन्हैया,,,

जब होवे, सच्चा प्यार, क्यों ना...

जो तूँ भजन, करे दिन राती l

श्याम सुंदर, बन जाए साथी ll

तूँ शरण तो...जय हो lll, आ इक बार,

क्यों ना मिले कन्हैया..

जब होवे, सच्चा प्यार, क्यों ना......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।