तूने भरा रूप विकराल कालका जय हो

सुधीर राजपूत
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जय हौवे .तेरी जय हौवें

जय काली. तेरी जय होवै

तूने भरा रूप विकराल

कालका जय होवे

जय होवे .तेरी जय होवे

जय होवे .तेरी जय होवे

कलकत्ते वाली कमाल कालका जय होवे

जयकाली कलकत्ते वाली

बिगिड़ी बात बनाने वाली

तेरा वचन ना जाय खाली

तू सारे जग की रखवाली

हाथ मैया के खड़ग विराजे

खडग विराजे खप्पर साजे

हाथ मइया के खडग विराजे

खडग वीराजे खप्पर साजे

तेरे गल मुंडन की माल

कालका जय होवे

तुने भरा रूप विकराल

जब जब भीड़ पड़ी भक्तों पर

तूने करी सहाय

दानव दल पर टूट पड़ी माँ

रणचंडी वन आई

शमशानों मैं सजे माँ काली

छम छम पायल बजती आली

शमशानो मैं सजे माँ काली

छम छम पायल बजती आली

तेरे खुल्ले लंबे बाल

कालका जय होवे

तूने भरा रूप विकराल

असुरो को तूने संघारा

पटक पटक कर उनको मारा

असुरो को तूने संघारा

पटक पटक कर उनको मारा

तेरे चरण पड़े महाकाल

कालका जय होवे

तूने भरा रूप विकराल

जय काली कलकत्ते वाली

बिगड़ी बात बनाने वाली

तेरा बचन ना जाये खाली

तू सारे जग की रखवाली

शीश दया का हाथ माँ रख दो

बिगडे सारे कारज कर दो

शीश दया का हाथ मा रख दो

बिगडे सारे कारज कर दो

मा रख लो भगत का ख्याल

कालका जय होवे

तूने भरा रूप विकराल

कालका जय होवे

सिंगर: सुधीर राजपूत

लेखक:सुधीर राजपूत

म्यूज़िक: DN मिश्रा जी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।