सांवेर की धरती

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

सांवेर की धरती....

सांवेर की धरती हनुमत साजे, चले है इनकी मर्जी

सांवेर की धरती

पाताल में जाकर जब बजरंग, अहिरावन राज मिटाते है

दिल बाग़ बाग़ हो जाता है, जब राम हृदय मुस्काते है

सुन के पतन की आवाजे, सुन के पतन की आवाजे,

यु लगे कही विध्वंस जगे

अरे राम लखन संग आते ही, सेना के मन संग हर्ष जगे.

बजरंग बाबा की यह प्रतिमा, यहाँ उल्टा दर्शन देती है

गम कोसो दूर हो जाता है. कष्ट और पीड़ा हर लेती है, ओ....

सुन जयसियाराम के नारों से, सुन जयसियाराम के नारों से

नगर, गगन, पूरा जगे

सांवेर नगर की यह भूमि, इंदौर उज्जैन के मध्य बसे

सांवेर की धरती.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।