शिंगार बसन्ती है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आई बहार बसन्ती है

आज युगल सरकार किया, शृंगार बसन्ती है - आई बहार०

ऋतुराज नुहार बसन्‍ती । बरस रही रसघार बसन्ती ।

वृन्दावन आकार बसन्‍ती । यमुना जल की धार बसन्ती ।

बेल वृक्ष की डार बसन्‍ती । महक रही गुलज़ार बसन्ती ॥

बाल वृद्ध तरु ग्वाल बाल की, डार बसन्ती है - आई बहार०

साजों की झंकार बसन्ती । पायल की छनकार बसन्ती ।

गूंज रही जयकार बसन्ती । राधा कृष्ण मुरार बसन्‍ती ।

आरती पूजा थाल बसन्ती । बजे शंख घड़ियाल बसन्ती ।

आज बसन्ती ठाकुर का, दरबार बसन्ती है - आई बहार०

फागुन की फुहार बसन्ती । सरसों की फुलवार बसन्‍ती ।

कोयल की कूकार बसन्ती । करे 'मधुप' गुंजार बसन्ती।

बुलबुल का हे प्यार बसन्ती । ठाकुर की जयकार बसन्ती।

आभूषण पट रेशम की, चमकार बसन्ती हे - आई बहार०

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।