सतगुरु दिता मेनू मस्त बना

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

सतगुरु दिता मेनू मस्त बना मस्तियाँ मैं वंडदी मैं फिरा

मेरे नैना विच नाम दा नशा मस्तियाँ मैं वंडदी फिरा

मिट गए ने गम सारे चढ़दी मस्ती

सिर दितियाँ वी मिले समजो ए सस्ती

इस आनंद दा की मूल मैं पा मस्तियाँ मैं वंडदी फिरा

सतगुरु दिता मेनू मस्त बना मस्तियाँ मैं वंडदी मैं फिरा

मेरे नैना विच नाम दा नशा मस्तियाँ मैं वंडदी फिरा

सतगुरु नाम वाला ए नशा ही अनोखा ऐ

इस दुनिया दे विच पल पल धोखा ऐ

पी के नाम रस नाचदी फिरा मस्तियाँ मैं वंडदी फिरा

सतगुरु दिता मेनू मस्त बना मस्तियाँ मैं वंडदी मैं फिरा

मेरे नैना विच नाम दा नशा मस्तियाँ मैं वंडदी फिरा

दुनिया दा बाली स‌ईयो अन्द्रो मैं पा लया

नैना विच मेरे हिरदे सतगुरु डेरा ला लया

मेरे रोम रोम गया ओ समा मस्तियाँ मैं वंडदी फिरा

सतगुरु दिता मेनू मस्त बना मस्तियाँ मैं वंडदी मैं फिरा

मेरे नैना विच नाम दा नशा मस्तियाँ मैं वंडदी फिरा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।