आरती श्री गंगा जी की

पारंपरिक
विष्णु भगवान आरती विविध भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

आरती श्री गंगे भव तारिनी ।

कलिमल हरनी, सर्व सुख करनी,

मोक्षमयी त्रिताप निवारिनी।।

विष्णुपदी जय ब्रह्मसरूपा,

जै जाहनवी गंगे जलरूपा,

तीर्थ मात सुरसरी अनूपा,

जय भगीरथी, पितर उद्घारिनी

आरती श्री गंगे० -

तन सिन्दूर सिर मुकुट सुहावे,

घट्ट अरु फूल शोभा अति पावे,

देख रूप चन्दा शरमावे,

मुस्कावत हरिप्रिय आहलादिनी

आरती श्री गंगे० -

अनहद नाम धाम सुखराशी,

कलियुग मोक्ष की पूर्णमासी,

धन धन मात कहें सब वासी,

सुरनर ऋषि मुनि सब ध्यावें,

आरती श्री गंगे० -

तीन लोक तेरो यश गावें,

वेद पुराण पार नहीं पावें,

बहे भारत त्रिलोक पाविनी

जीव जन्त रक्षपाल स्वामिनी

आरती श्री गंगे० -

दर्शन ध्यान स्नान करे जो,

पूजा पाठ गुणगान करे जो,

पुण्य धर्म पिण्डदान करे जो,

दे निजधाम 'मधुप' मन-भावनी

आरती श्री गंगे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।