वे सब तों सोणेंयां,हाय वे मनमोंणेंयां

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

वे सब तों सोणेंयां,हाय वे मनमोंणेंयां

मैं तेरी हो गई,प्यार विच खो गई ‌‌

वे सब....

1. मुखड़े तेरे तों फुल शरमावे,तूं तां रंग

रगिंला वे

मैं तेरी हो गई,प्यार विच खो गई

वे सब....

2. नैंना मेरे दिदार में मगंदे,तूं ऐंना क्यों

शर्मिला वे

मैं तेरी हो गई,प्यार विच खो गई

वे सब....

3. वैख़ तेरे वल चंन शरमावे,के ढिग-ढिग

पैंदें तारे ने

मैं तेरी हो गई,प्यार विच खो गई

वे सब....

4. बोल दे गल्ला फुला झड़ियां,खोल दे तूं

द्वारे वे

मैं तेरी हो गई,प्यार विच खो गई

वे सब....

5. ऐ दिन गिंन-गिंन-गिंन गुज़रंन मेरे,वे

आजा सोंणेंयां मैं सदके तेरे

मैं तेरी हो गई,प्यार विच खो गई

वे सब....

6. ऐ घुंघरुं छंन-छंन-छंन बोलणं मेरे,वे

आजा सोंणेंयां मैं चाकर तेरी

मैं तेरी हो गई,प्यार विच खो गई ‌‌‌

वे सब....

बाबा धसका पागल पानीपत

संपर्कंसुत्र-7206526000

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।