निवाँ होके चले बन्दैया

पारंपरिक
श्री राम भजन विविध भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

निवाँ होके चले बन्दैया नही जिंदगी दा कोई बसा,

निवाँ होके चल बन्दैया, सदा निवियाँ नू रब मिलदा,

निवाँ होके चल बन्दैया...

माया दे गुमान विच राम नू भुलाई ना, राम नू भुलाई ना,

हीरे जिया जन्म तेरा मिट्टिच मिलाई न, मिट्टी विच मिलाई ना,

बड़े यतना दे नाल मिलदा, निवाँ होके…

बंदा अभिमानी मेरे राम जी नू भावे ना, राम जी नू भावे ना,

कामी, क्रोधी, लोभी ओदी शक्ति नू पावे ना, शक्ति नू पावे ना,

तू छड़ के मोह माया निवाँ होके चल बन्दैया…

निवाँ होके गज ने सी सदिया कन्हाई नू, सदिया कन्हाई नू,

भिलनी दे बेरां ने रिझाया रघुराई नू, रिझाया रघुराई नू,

हूण तू वी टेर लगा, निवाँ होके चल बन्दैया…

माया दे घमण्ड विच चंगे-चंगे लुट गये,

भर के तिजोरिया नू सारे इथे सुट गये सारे, इथे सुट गये,

कख वी ता ना नाल गया, निवाँ होके चल बन्दैया…

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।