राधे राधे गोविंद, गोविंद राधे राधे

सुश्री अखिलेश्वरी देवी
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

राधे राधे गोविंद, गोविंद राधे राधे।

श्री वृषभानुनंदिनी राधे,

नँदनन्दन गोविंद श्री राधे राधे।

प्रेम रूप रस रूपिणी राधे,

सोइ रूप नँदनंद श्री राधे राधे।

जोइ वृषभानुनंदिनी राधे,

सोइ जानिय गोविंद श्री राधे राधे।

महाभावरूपिणि श्री राधे राधे,

रस अम्बुधी गोविंद श्री राधे राधे।

अलबेली सरकार राधे,

अलबेलो गोविंद श्री राधे राधे।

श्री बरसानो राजति राधे,

नन्दगाम गोविंद श्री राधे राधे।

गहवर कुंजनि विहरति राधे,

गोवर्धन गोविंद श्री राधे राधे।

गोपिन संग विराजति राधे,

गोपन सँग गोविंद श्री राधे राधे।

वृन्दावन विहरति श्री राधे,

संग संग गोविंद श्री राधे राधे।

प्रेम रूप रस घन धन राधे,

गोधन धन गोविंद श्री राधे राधे।

आरत नाम पुकारत राधे,

भजत सुनन गोविंद श्री राधे राधे।

पतित अपनावति श्री राधे,

निर्मल मन गोविंद श्री राधे राधे।

पायो मादन रस इक राधे,

नहिं पायो गोविंद श्री राधे राधे।

रस अम्बुधि रसिका श्री राधे,

रसिक रास गोविंद श्री राधे राधे।

कीन्यो कृपा दृष्टि जब राधे,

'कृपालु' गोविंद श्री राधे राधे।

पुस्तक : ब्रज रस माधुरी, भाग-1

पद संख्या : 112

पृष्ठ संख्या : 204

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।