जिथे काली पैर धरदी जान धरती नू पैंदीया तरेड़ां

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ कालका चण्डी रूप धारया

चण्ड मुण्ड चुन्न चुन्न सी मारिया

कट्टे भगता दे दुखा वाला गेड़ा

माँ जिथे काली पैर धरदी

जान धरती नू पैंदीया तरेड़ां...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।