कृष्ण के सर पर मोर मुकुट

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कृष्ण के सर पे मोर मुकुट यह भाता है

रूप अनुपम सबको यह ललचाता है...२

बंसी जब लगती है इसके होठों पे

सुर न जाने कहाँ से ये लै आता है

कृष्ण के सर पे मोर मुकुट...

कृष्ण है गोकुल के नन्द लाल का छोरा

देखन में सुन्दर पर नटखट भी है थोड़ा

कृष्ण मुरारी ओ कृष्ण मुरारी

कृष्ण मुरारी पीड़ा हर लो सारी

कृष्ण मेरे कृष्ण कृष्ण मेरे कृष्ण

कृष्ण कृष्ण कृष्ण कृष्ण कृष्ण कृष्ण कृष्ण कृष्ण मेरे कृष्ण

जपता हूं जब नाम तो मन मुस्काता है

रूप अनुपम सबको यह ललचाता है

कृष्ण के सर पे मोर मुकुट...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।