रघुनंदन आ गए, राघव जी आ गए

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

राम नाम लेने का आनंद और भी बढ़ गया

सबके सर मेरे राम की भक्ति का रंग चढ़ गया

बीत गया वनवास प्रभु का और सबके मन हर्षा गए

सज धज कर मेरे रामलला अपने मंदिर में आ गए"

राम राम जय राम सिया राम राम जय राम राम,,2

नैनो के रास्ते सबके मन में समा गए

रघुनंदन आ गए राघव जी आ गए

सारी दुनिया पर मेरे राघव ही छा गए

रघुनंदन आ गए राघव जी आ गए

वर्षों से तरसे जिसको वो शुभ दिन आ गया

सच्चा सुखराम नाम का जीवन में आ गया

मंगल बधाई मेरे राघव बटवा रहे

रघुनंदन आ गए राघव जी आ गए

स्वर्ण सिंहासन ऊपर ठाड़े प्रभु रामलला

हाथों में धनुष बाण ले मुस्कुराए रामलला

मीठी मुस्कनिया से वो चित् चुरा गए

रघुनंदन आ गए, राघव जी आ गए

प्यासे प्यासे नैनो के नैना अभिराम है

हृदय में बसने वाले जन-जन के राम है

नैनामृत भर नैनो से अमृत बरसा रहे

रघुनंदन आ गए राघव जी आ गए

अब मेरे राम कभी भी वन को न जाएंगे

राम का यह भारत मेरे राम ही चलाएंगे

खुशियों के आंसू सबकी आंखों में आ गए

रघुनंदन आ गए राघव जी आ गए

नैनो के रास्ते सबके मन में समा गए

नंदन आ गए राघव जी आ गए

सारी दुनिया पर मेरे राघव ही छा गए

रघुनंदन आ गए राघव जी आ गए

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।