राधे तोहिं भूलूँ नहिं कभू पल आधे

सुश्री अखिलेश्वरी देवी
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

राधे तोहिं भूलूँ नहिं कभू पल आधे।

मेरा सब कुछ तेरा दिया हुआ राधे।

तन ले ले मन ले ले धन ले ले राधे।

जनम जनम का भिखारी तोहिं का दे।

बरबस ले ले सब प्रेम सुधा दे।

भुक्ति मुक्ति माँगूँ नहिं प्रेम सुधा दे।

निज सेवा ना दे जो तो जन सेवा दे।

पिय सँग गलबाँही दै के दिखा दे।

ब्रजरस की इक बूँद पिला दे।

अधम उधारन विरद निभा दे।

तोहिं तजि जाऊँ कित नाम बता दे।

मुझ खोटे को खरों के सँग चला दे।

तू ही इक मेरी यह बोध करा दे।

छोड़ूंँ नहिं पाछा चाहे चक्र चला दे।

तेरी दासी माया वाय डाटि भगा दे।

तोहिं दीन प्रिय मोहिं दीन बना दे।।।

अपने कृपालु को भी प्रेम दिला दे॥

पुस्तक : ब्रजरस माधुरी-3

पृष्ठ संख्या : 116

कीर्तन संख्या : 60

सर्वाधिकार सुरक्षित © जगद्गुरु कृपालु परिषत्

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।