इंदरगढ़ की रानी ऊंचा महला की पटरानी

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॥ पावन पाठ ॥

दोहा

इंद्रगढ़ बिजासना , मां बरवाड़ा में चौथ

ऊपर माल में जोगणिया , ओ मैया थारे जले अखड़ी जोत

अन्तरा -

इंद्रगढ़ की रानी ऊंचा महला की पटरानी

थारो मंदिर प्यारो लागे मारी माई , थारो मंदिर प्यारो लागे जी

इंद्रगढ़ की रानी ऊंचा महला में रेहबाली थारो मंदिर प्यारो लागे मारी माई

थारो मंदिर प्यारो लागे जी...........

ओ ओ ओ.... सातवीं शदी में देबा चारण के जन्मयाई

कलयुग में पर्चा देवे मारी माई , कलयुग में पर्चा देवे जी ...

सातवीं शदी में देबा चारण के जन्मयाई

कल्युग में पर्चा देवे जी , कल्युग में पर्चा देवे जी ...

ओ ओ ओ.... गुरु कृपानाथ जी थाने मनावे , थे तो इंद्रगढ़ की डुंगरिया में बसगई मारी माई जी प्यारो प्यारो मंदिरयो

कृपानाथ गुरु जी थाने मनावे ,

थे तो इंद्रगढ़ की डुंगरिया में रमगी मारी माई जी प्यारो प्यारो मंदिरयो.......

बिजासन मैया थारी ऊंची नीची पैडया , मैया चडयो न उत्तरयो जावे री

मासे चडयो न उत्तरयो जावे री

बिजासन माई थारी ऊंची नीची पैडया , मैया लिफ्ट लगा दे थारा मंदिर मेरी मैया लिफ्ट लगा दे थारा मंदिर में

ओ ओ ओ..... सातों बहना साथ मैया लारा लारा रेवे

भगता पे कृपा करज्यों मारी माई जी , भगता पर कृपा कर दिज्यो........

सातों बहना साथ मैया लारा लारा रेवे

भगता का दुखडा हर दिज्यो जे रे भागता का दुखड़ा हर दिज्यो

ओ थाकी पेड़या पे मैया थाकी तो सवारी घूमे , डर घणों लागे प्यारी मारी माई जी , डर माने लागे जी

थाकी तो पेड़या पे मैया थाकों शेरू घूमे भगता की रक्षा करज्यो मारी माई जी , मंदिरया में आया रे

राजस्थान में जन्मयाई , जिला बूंदी में रेहबाली

मैया इंद्रगढ़ की डुंगरिया में रमगी रे , मैया इंद्रगढ़ की डुंगरिया में रमगी रे

राजस्थान में जन्मयाई , बूंदी जिला में रेहबाली

मैया इंद्रगढ़ की डुंगरिया में रमगी रे , मैया इंद्रगढ़ की डुंगरिया में रमगी रे

ओ हेमन्त सैनी तो मैया भजन बनावे मैया , थारे चरणा को चाकर राखो मारी माई जी , चरणा को सेवक राखो जी.....

हेमन्त सैनी थारो भजन बनावे थारे चरणा को चाकर राखो मारी माई जी ,

चरणा को सेवक राखो जी.....

इंदरगढ़ महारानी धोहला महला की पटरानी थारो मंदिर प्यारो लागे मारी माई जी दर्शन दे दे ने.....

|| बोल श्री बिजासन मैया की ||

लेखक & गायक - हेमन्त सैनी इंदरगढ़

मो- 7878793015,9511552408

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।