मेरो मन वृंदावन में अटको, मेरो मन हरिचरणन में अटको

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरो मन वृंदावन में अटको, मेरो मन हरिचरणन में अटको,

बनके जोगन डोलत ब्रज में, बन के जोगन डोलत ब्रज में,

पीवत यमुना जल को,

मेरो मन वृन्दावन में अटको, मेरो मन हरिचरणन में अटको

मेरो मुझ में कुछ ना मोहन, तेरी मिट्टी तेरो कण कण,

मेरो मुझ में कुछ ना मोहन, तेरी मिट्टी तेरो कण कण,

वृंदावन की कुंज गलिन में, वृन्दावन की कुंज गलिन में,

मिल जाओ प्रभु मुझको,

मेरो मन वृन्दावन में अटको, मेरो मन हरिचरणन में अटको ...

इस जोगन के तुम हो साजन, करना है सब आत्म समर्पण,

इस जोगन के तुम हो साजन, करना है सब आत्म समर्पण,

अंत समय आनंद मिले मोहे, अंत समय आनंद मिले मोहे,

बस वेणु के रस को,

मेरो मन वृन्दावन में अटको, मेरो मन हरिचरणन में अटको ....

याद में तोरी भई बावरी, सुध लो मोरी कुंज बिहारी,

याद में तोरी भई बावरी, सुध लो मोरी कुंज बिहारी,

अब आओ मेरे प्राण पियारे, अब आओ मेरे प्राण पियारे,

अपनाओ या जन को,

मेरो मन वृन्दावन में अटको, मेरो मन हरिचरणन में अटको.

मेरो मन वृंदावन में अटको, मेरो मन हरिचरणन में अटको,

बनके जोगन डोलत ब्रज में, बन के जोगन डोलत ब्रज में,

पीवत यमुना जल को,

मेरो मन वृन्दावन में अटको, मेरो मन हरिचरणन में अटको ...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।