शयन आरती

पारंपरिक
श्री कृष्ण आरती कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

शयन करो नंदलाल.. अब तुम शयन करो

1) फूलो की मै सेज बिछाऊ

मोर पंख का चवर झुलाऊ

सुंदर बदन विशाल अब तुम शयन करो

2) भाव भक्ति के कारण स्वामी

बहुत फिरे हो अन्तर्यामी

चरण दबाऊ नन्द लाल, अब तुम शयन करो

3) भक्ति मुक्ति को देवेन वाले,

भगतो के हो प्राणों से प्यारे,

दुष्टों के हो काल, अब तुम शयन करो

4) हाथ जोड़ के आरती गाऊ,

प्रेम भाव से तुम्हे रिझाऊं

जग के तुम आधार, अब तुम शयन करो

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।