बरसाने में बसा लो

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तरज़-मुझे अपने बुलाया,ये करमं नहीं तो क्या है

बरसाने में बसा लो,मुझको हे श्यामा प्यारी

बरसाओ ऐसी करुणा,जब तक रहे जिंदगानी

बरसाने में....

1.मैं थक गई किशोरी,दुनिया कि होते होते

कोई हुआ न अपना,कहूँ सच ये रोते रोते

अपना लो श्यामा प्यारी,कभी छोड़ना न दामन

बरसाने में....

2.मेरी आत्मा से पूछो,तुम्हे कितना चाहता हूँ

हर चाहना के पीछे,बस तुमको चाहता हूँ

बस कर दो एक इशारा,तेरी है मेंहरबानी

बरसाने में....

3.ले जाओ अब तो श्यामा,मेरी बाँह अब पकड़ के

घबरा रही किशोरी,कर्मो से अपने डर के

शर्मिंदा हूँ प्यारी,कैसे कहुं जुबां से

बरसाने में....

4.कितनें धनी हैं श्यामा,जिन्हें आप ने संभाला

करुणा की कोर करके,सिंधु से भव निकाला

मेरे सर पे हाथ रख दो,मै दासी हूँ तुम्हारी

बरसाने में....

बाबा धसका पागल पानीपत

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।