ब्रह्मलोक में ब्रह्मा नाचे शिव नाचे कैलाश में

पारंपरिक
महादेव भजन विविध भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

ब्रह्मलोक में ब्रह्मा नाचे शिव नाचे कैलाश में।

सांवरियो गिरधारी नाचे वृंदावन के रास में।

ब्रह्मलोक में ब्रह्मा नाचे शिव नाचे कैलाश में।

सांवरियो गिरधारी नाचे वृंदावन के रास में।

ऐसी मुरली बजाई रे सांवरा, मीठी-मीठी राग में।

ऐसी मुरली बजाई रे सांवरा, मीठी-मीठी राग में।

पागल हो गई सांवरा, थारी मुरली की आवाज में।

ब्रह्मलोक में ब्रह्मा नाचे शिव नाचे कैलाश में।

सांवरियो गिरधारी नाचे वृंदावन के रास में।

नथली तो मैं कानों में पहनी, झुमका पहना नाक में।

नथली तो मैं कानों में पहनी, झुमका पहना नाक में।

पागल हो गई सांवरा, थारी मुरली की आवाज में।

ब्रह्मलोक में ब्रह्मा नाचे शिव नाचे कैलाश में।

सांवरियो गिरधारी नाचे वृंदावन के रास में।

सुरमा तो मैं होठों में लगाया, लाली लगाई आंख में।

पागल हो गई सांवरा, थारी मुरली की आवाज में।

ब्रह्मलोक में ब्रह्मा नाचे शिव नाचे कैलाश में।

सांवरियो गिरधारी नाचे वृंदावन के रास में।

चुड़लो को तो मैं गले में पहनीयो ,हार पहनियो हाथ में।

चुड़लो को तो मैं गले में पहनीयो ,हार पहनियो हाथ में।

पागल हो गई सांवरा, थारी मुरली की आवाज में।

ब्रह्मलोक में ब्रह्मा नाचे शिव नाचे कैलाश में।

सांवरियो गिरधारी नाचे वृंदावन के रास में।

चुनर ओडी लहंगा पहनियों, काँचल लेनी हाथ में।

चुनर ओडी लहंगा पहनियों, काँचल लेनी हाथ में।

पागल हो गई सांवरा, थारी मुरली की आवाज में।

ब्रह्मलोक में ब्रह्मा नाचे शिव नाचे कैलाश में।

सांवरियो गिरधारी नाचे वृंदावन के रास में।

पायल तो में कमर में पहनी, कनोरी पहनी पांव में।

पायल तो में कमर में पहनी, कनोरी पहनी पांव में।

पागल हो गई सांवरा, थारी मुरली की आवाज में।

ब्रह्मलोक में ब्रह्मा नाचे शिव नाचे कैलाश में।

सांवरियो गिरधारी नाचे वृंदावन के रास में।

दूध तो मैं कुंड में ढोलियों, लोयो लीनो हाथ में।

दूध तो मैं कुंड में ढोलियों, लोयो लीनो हाथ में।

पागल हो गई सांवरा, थारी मुरली की आवाज में।

ब्रह्मलोक में ब्रह्मा नाचे शिव नाचे कैलाश में।

सांवरियो गिरधारी नाचे वृंदावन के रास में।

पुत तो पालनियो छोडियो ,साजन छोडियो सेज में।

पुत तो पालनियो छोडियो ,साजन छोडियो सेज में।

पागल हो गई सांवरा, थारी मुरली की आवाज में।

ब्रह्मलोक में ब्रह्मा नाचे शिव नाचे कैलाश में।

सांवरियो गिरधारी नाचे वृंदावन के रास में।

ब्रह्मलोक में ब्रह्मा नाचे शिव नाचे कैलाश में।

सांवरियो गिरधारी नाचे वृंदावन के रास में।

ब्रह्मलोक में ब्रह्मा नाचे शिव नाचे कैलाश में।

सांवरियो गिरधारी नाचे वृंदावन के रास में।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।